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Humanity in Religious Point of View: HOPE Foundation Holds Interfaith Meet

Humanity in Religious Point of View: HOPE Foundation Holds Interfaith Meet 

मानवतावाद मानव मूल्य “Manavta Dhaarmik Drishtikon mein” और चिंताओं पर ध्यान केंद्रित करनेवाला अध्ययन, दर्शन या अभ्यास का एक दृश्टिकोण है। सबके लिए इस शब्द के मायने अलग-अलग होते है । किसी की मानवता एक ख़ास वर्ग तक सिमित रहती है, किसी की ख़ास नस्ल तक तो किसी कि मानवता अपने देशवासियो तक सिमट जाती है ।

इस समय एक ऐसे मंच की आव्य्श्यक्ता प्रतीत हुई, जहां लोग बैठ सके, चर्चा करे और सत्संग का लाभ प्राप्त कर सके, इसी आव्य्श्यकता को महसूस करते हुए, अल असर संस्था द्वारा भोपाल शहर में एक अनूठा प्रयास किया गया, संस्था द्वारा 23 दिसंबर, शनिवार को समन्वय भवन, अपैक्स बैंक न्यू मार्केट में शाम 6:30 बजे अंतर्धार्मिक सम्मलेन का आयोजन किया गया, इसमें इस्कॉन से डॉ. सव्यसाची दास, अल-असर एजुकेशनल सोसायटी के अध्यक्ष अतहर खान, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष ज्ञानी दलिप सिंह और दिव्य वाणी संघ के अध्यक्ष फादर जोस प्रकाश बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित रहे।

उनकी बातों के कुछ अंश: डॉ. सव्यसाची दास ने कहा कि मनुष्य अपनी पांचो इन्द्रियों को संतुष्ट करने के लिए मानवता के विरुद्ध चला जाता है जो सही नहीं ।

अतहर खान ने बताया कि मानवता को विश्व स्तर पर स्थापित करने में धर्म एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जैसे कि इस्लाम में हर मनुष्य को मरने के बाद ईश्वर को अपने अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब देने की धारणा लोगों को मानवता के लिए प्रेरित करती है और अन्याय करने से रोकती है।

फादर जोस प्रकाश ने एक सवाल के जवाब में कहा कि कोई मनुष्य अगर अपनी इच्छा से किसी धर्म को अपनाता है तो यह उसका मानवाधिकार है और इसे रोकना सविंधान और मानवता के विरुद्ध है।

ज्ञानी दलीप सिंह ने सिख धर्म का पक्ष रखते हुए बताया कि मानवता के कार्य करने के लिए धर्म नहीं देखा जाना चाहिए, खालसा द्वारा रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए मदद इसकी मिसाल है।

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