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Planning Commission presents 3 years Action Agenda

नीति आयोग ने पेश किया तीन सालों का ‘एक्शन एजेंडा’

Planning Commission presents 3 years Action Agenda

नई दिल्ली: प्रधान मंत्री ने नये भारत के निर्माण के लिये “सब का साथ और सबका विकास” का नारा दिया है। इस नारे को मूर्तरुप मे लाने के लिये नीति आयोग ने विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक रणनीति तैयार की है। अगले तीन साल की इस नीति एक्शन एजेंडा वित्त मंत्री अरुण जेटली और नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पंगरिया ने आज अनावरण किया।

नीति आयोग का एक्शन एजेंडा देश के महात्वाकाक्षी विकास की रुपरेखा पेश करता है। साल 2020 तक विभिन्न आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में विकास का बढ़ाने के लिये सरकार के लक्ष्य औऱ उनको पूरा करने के लिये आवश्यक कदम का उल्लेख इस एजेंडा में किया गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार समाज के सभी वर्गों के लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए सभी कदम उठा रही है। सरकार की नीतियों ने निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी लाने का काम किया है।

एक्शन एजेंडा ने भारत के सर्वांगीण विकास को प्राप्त करने का एक मार्ग प्रस्तावित किया है। यह विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिये निर्यात-आधारित योजना के विकास का भी प्रस्ताव दिया है। देशभर में संतुलित विकास प्राप्त करने के लिए अलग अलग क्षेत्रों की जरुरतों के हिसाब से विकास की नीतियों का बनाने का भी प्रस्ताव किया गया है, ताकि समृद्धि का एक न्यूनतम स्तर देश के हर नागरिक के हिस्से में आये। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि एक्शन एजेंडा केंद्र और राज्य सरकारों के लिये एक टेक्सटबुक की तरह है जिससे विकास के बड़ी नीतियों को लागू करने में मदद मिलेगी।

यह भ्रष्टाचार और काले धन को खत्म करने के उपायों की भी चर्चा करता है, जो कि सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। एजेंडा में सभी स्तरों पर शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। नीती आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगारीया ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में ध्यान देने से भविष्य में रोजगार को बेहतर बनाया जा सकेगा। प्रधानमंत्री ने 2022 तक किसानों की आय दुगुना करने का संकल्प लिया है, और एक्शन एजेंडा इसको हासिल करने के रास्ते भी बताता है।

प्रधान मंत्री के विकास का मूल सिद्धांत “सबका साथ, सबका विकास” रहा है जिसका अर्थ है कि विकास की मुख्यधारा में देश का हर नागरिक शामिल होना चाहिए। नीति आयोग के अगले तीन साल के एक्शन एजेंड में इस भावना को क्रियात्मक रुप देने की कोशिश कि गयी है ताकि एक समावेशी समाज का सपना साकार हो सके।

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