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भीड़तंत्र द्वारा हत्याओं के किलाफ़ सम्मलेन सम्पन्न l विकास के बदले मिला भीड़तंत्र का तोहफा- सईद

भोपाल 19 अगस्त 2017। मोदी सरकार में निर्दोष लोगों पर भीडतंत्र की तरफ से जानलेवा हमले और उनकी हत्या एक सिलसिलेवार कहानी बन गई है। गाय को मुकद्दस मानना और उसकी पूजा देश में कोई नई बात नही है।देश के कुछ राज्यों में पिछले कई वर्षों से गाय को जिब्ह करने पर पाबंदी है।गाय के नाम पर हमले और हत्या नरेन्द्र मोदी सरकार का उस अवाम के लिए विशेष पैकेज मालूम पड़ता है , जिन्होंने ने नरेन्द्र मोदी को वोट किया था।यह बात भीडतंत्र के खिलाफ 1 से 25 अगस्त तक जारी राष्ट्रीय मुहिम के अन्तर्गत आयोजित सम्मेलन में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए सईद ने कही।सम्मेलन को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एडवोकेट शर्फुद्दीन अहमद ने भी संबोधित किया । अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट साजिद सिद्दीकी ने की। संचालन सलीम अंसारी ने किया और आभार एसडीपीआई के प्रदेश उपाध्यक्ष इरफानुलहक अन्सारी ने माना l
श्री सईद ने आगे कहा कि पार्टी की इस मुहिम से उन लोगों को ताकत मिलेगी जो अवाम को इंसाफ दिलाने के लिए काम कर रहे हैं ।उन्होंने कहा कि मोदी सरकार प्रजातंत्र, धर्मनिरपेक्षता, कानून की सत्ता को लागू करने और संविधान की धारणा पर चलने में नाकाम रही है । धर्मनिरपेक्ष दलों के दोहरे चरित्र सामने आ रहे हैं ।मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और राष्ट्रपति चुनाव में अपने रूख के चलते अवाम का विश्वास खो दिया। नितीश कुमार ने बिहार में अपने दोहरे चरित्र के जरिये सेक्यूलर राजनीति पर जोरदार तमाचा मारा है।देश के मौजूदा हालात में लेफ्ट पार्टियों का भी कोई मजबूत रूख सामने नहीं आ रहा है । श्रीमति सोनिया गाँधी जिन्होंने राष्ट्रपति चुनाव पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह सही और गलत के बीच लड़ाई है वहीं राष्ट्रपति उम्मीदवार मीरा कुमार ने इस बात का यकीन दिलाया था कि वह पीड़ित तबकात के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।यहाँ बातें सुनने में तो बहूत अच्छी मालूम होती हैं।मैं पूछना चाहता हूँ सोनिया गांधी ने जिस लड़ाई की बात की थी वह लड़ाई कहाँ लड़ी जा रही है?  मीरा कुमार ने जिस संघर्ष की बात की थी वह कहाँ हो रहा है ? उन्होंने कहा कि मुस्लिमों और दलितों की समस्याओं के समाधान के सियासी, न्यायिक और सामाजिक दरवाजे बंद कर दिए गये हैं ।श्री सईद ने कहा कि अगर मौजूदा हालात पर लगाम नहीं लगाई गई तो इसका खामियाजा सिर्फ मुस्लिम और दलित ही प्रभावित नही होंगे बल्कि आम लोग भी इसके दुष्परिणाम की चपेट में आने बच नहीं पाएंगे। जब देश की गंगा-जमूनी तेहजीब और मूल्यों पर भीडतंत्र के हमले बढ़ते जा रहे हों एसे हालात में खामोश तमाशाई बने रहना अच्छे नागरिक की पहचान नही है ।देश के हर जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है कि वह उस जुनूनी भीड़ को रोकने के लिए आगे बढ़े जो गाय के नाम पर लोगों की हत्या कर रहे हैं ।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एडवोकेट शर्फुद्दीन ने कहा कि एसडीपीआई देश को खौफ के माहौल से निकालने के लिए सभी अम्न पसंद लोगों को संगठित कर रही है ,तथा देश के प्रजातांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों के लिए संघर्षशील है। उन्होंने कहा कि गाय के नाम पर भीडतंत्र द्वारा  हत्या बर्दाश्त नहीं की जाएगी।देश में कानून की सत्ता होनी चाहिये और हर नागरिक को उसके बुनियादी अधिकार मिलने चाहिए । कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट साजिद सिद्दीकी ने कहा कि देश के लोगों में धर्म या संस्कृति के नाम पर नफरत पैदा करना निंदनीय है उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे तत्वों के खिलाफ कानून सम्मत कार्रवाई होनी चाहिए। सम्मेलन को मूल निवासी पार्टी अध्यक्ष सोहनलाल सौंधया, बहुजन मुक्ति पार्टी प्रदेश अध्यक्ष मीना आमखेरे, प्रजातांत्रिक समाधान पार्टी अध्यक्ष कमल सिंह चैहान, बहुजन गोंडवाना पार्टी महासचिव संजीव खैरवार, अखिल भारतीय ओबीसी महासभा अध्यक्ष ललित गौर, पिछड़ा समाज पार्टी युनाइटेड महासचिव चेतु भाई पटेल, आल इंडिया दलित महिला अधिकार मंच की कुमारी गायत्री सोनकर, महाराजा बली पुनरूत्थान संघ  प्रदेश अध्यक्ष विदयराज मालवीय,नेता एसडीपीआई एडवोकेट अब्दुल हमीद खान और जमीअत उलैमा प्रदेश अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने भी अपने विचार रखे।
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